नई दिल्ली। अमेरिका-इजरायल-ईरान युद्ध के बाद दुनियाभर में तेल संकट गहराता जा रहा है। इसी बीच पाकिस्तान सरकार ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 5 रुपये प्रति लीटर की कटौती की है। कटौती के बाद पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमत 409.78 रुपये प्रति लीटर और हाई-स्पीड डीजल की कीमत 409.58 रुपये प्रति लीटर हो गई है।
हर हफ्ते बदल रही हैं ईंधन की कीमतें
पाकिस्तान सरकार 28 फरवरी को शुरू हुए युद्ध के बाद से हर शुक्रवार रात पेट्रोलियम कीमतों में बदलाव कर रही है। पिछले सप्ताह सरकार ने पेट्रोल की कीमत में 14.92 रुपये प्रति लीटर और हाई-स्पीड डीजल में 15 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी।
युद्ध शुरू होने के बाद 6 मार्च को सरकार ने पहली बार पेट्रोल और डीजल के दाम में 55 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी। इसके बाद 9 मार्च को खर्च में कटौती के कई उपायों की घोषणा की गई थी।
भारत में चार साल बाद बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम
भारत में सरकारी तेल कंपनियों ने चार वर्षों के लंबे अंतराल के बाद शुक्रवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की। इससे पहले अप्रैल 2022 से कीमतें स्थिर थीं। हालांकि मार्च 2024 में लोकसभा चुनाव से पहले दोनों ईंधनों के दाम में 2 रुपये प्रति लीटर की कटौती की गई थी।
इस दौरान Pakistan में ईंधन कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिला, जबकि भारत में लंबे समय तक कीमतों को स्थिर रखा गया।
चुनाव खत्म होने के बाद हुआ संशोधन
चार राज्यों असम, केरल, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव समाप्त होने के 16 दिन बाद यह बढ़ोतरी लागू की गई। मतदान अवधि के दौरान ईंधन कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया था, जबकि पश्चिम एशिया संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल कीमतों में तेजी बनी हुई थी।
तेल कंपनियों के अनुसार चुनाव से पहले पेट्रोल पर 14 रुपये प्रति लीटर, डीजल पर 42 रुपये प्रति लीटर और एलपीजी पर 674 रुपये प्रति लीटर तक का घाटा उठाया जा रहा था।
दुनिया के मुकाबले भारत में कम बढ़े दाम
वैश्विक आंकड़ों के मुताबिक म्यांमार में पेट्रोल 89.7 प्रतिशत और डीजल 112.7 प्रतिशत तक महंगा हुआ है। वहीं मलेशिया, पाकिस्तान, यूएई और अमेरिका में भी ईंधन कीमतों में 40 से 80 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
इसके मुकाबले India में पेट्रोल केवल 3.2 प्रतिशत और डीजल 3.4 प्रतिशत महंगा हुआ है। सरकार का दावा है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारी उछाल के बावजूद आम लोगों पर बोझ कम रखने के लिए कीमतों को लंबे समय तक नियंत्रित रखा गया।


