32 साल बाद राजस्थान को मिलेगा यमुना का पानी, हुआ ऐतिहासिक समझौता

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यमुना जल समझौते पर हस्ताक्षर के दौरान मौजूद केंद्रीय और राज्य सरकार के प्रतिनिधि
यमुना जल समझौते पर हस्ताक्षर के दौरान मौजूद केंद्रीय और राज्य सरकार के प्रतिनिधि

नई दिल्ली : राजस्थान और हरियाणा के बीच यमुना जल समझौते (MoA) पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते पर राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल की उपस्थिति में सहमति बनी। करीब 32 वर्षों से लंबित इस परियोजना के क्रियान्वयन का रास्ता अब साफ हो गया है।

मुख्यमंत्री ने बताया ऐतिहासिक फैसला

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि यह समझौता केवल दो राज्यों के बीच पानी के बंटवारे का नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह फैसला पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा कदम साबित होगा।

32 साल बाद लागू होगा समझौता

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल के अनुसार, यमुना जल बंटवारे को लेकर वर्ष 1994 में समझौता हुआ था, लेकिन यह पूरी तरह लागू नहीं हो पाया। 17 फरवरी 2024 को दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक में भूमिगत पाइपलाइन के माध्यम से पानी पहुंचाने के लिए संयुक्त DPR तैयार करने का निर्णय लिया गया। इसके बाद 23 जून 2026 की बैठक में परियोजना के क्रियान्वयन पर सहमति बनी और अब MoA पर हस्ताक्षर कर दिए गए।

इन जिलों को मिलेगा सबसे बड़ा लाभ

इस परियोजना के तहत हरियाणा के हथिनीकुंड बैराज से भूमिगत पाइपलाइन के माध्यम से राजस्थान के हिस्से का यमुना जल पहुंचाया जाएगा। इससे चूरू, सीकर, झुंझुनूं और शेखावाटी क्षेत्र के अन्य इलाकों को पेयजल उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी, जहां लंबे समय से पानी की कमी बनी हुई है।

34,102 करोड़ रुपये की परियोजना

परियोजना की अनुमानित लागत 34,102 करोड़ रुपये है। इसके तहत राजस्थान को 577 एमसीएम (MCM) यमुना जल उपलब्ध कराया जाएगा। 295.5 किलोमीटर लंबी भूमिगत पाइपलाइन के माध्यम से पानी चूरू जिले के हंसियावास जलाशय तक पहुंचाया जाएगा। परियोजना में तीन बड़ी भूमिगत पाइपलाइन, आधुनिक जल प्रबंधन प्रणाली, निरीक्षण सड़क और कृत्रिम जलाशय का निर्माण भी प्रस्तावित है।

DPR तैयार, SPV का होगा गठन

राजस्थान सरकार के अनुसार परियोजना की विस्तृत रिपोर्ट (DPR) केंद्रीय जल आयोग को भेजी जा चुकी है। हरियाणा ने भी पाइपलाइन के अलाइनमेंट को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। परियोजना के निर्माण और संचालन के लिए DPR के आधार पर ‘राजस्थान-हरियाणा यमुना वाटर प्रोजेक्ट स्पेशल पर्पस व्हीकल’ (SPV) का गठन किया जाएगा।

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