बेंगलुरु। कर्नाटक सरकार ने नाबालिगों के बीच बढ़ते शराब और तंबाकू सेवन को गंभीरता से लेते हुए सख्त कदम उठाए हैं। हाल ही में 4,000 से अधिक विद्यार्थियों पर किए गए एक अध्ययन में सामने आया कि लगभग हर तीन में से एक युवा शराब या तंबाकू सेवन से जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों का सामना कर रहा है। अध्ययन में यह भी पाया गया कि कुछ युवाओं ने 17 वर्ष की आयु से पहले ही शराब का सेवन शुरू कर दिया था।
अध्ययन के बाद सरकार ने दिखाई सख्ती
अध्ययन के निष्कर्ष सामने आने के बाद कर्नाटक के गृहमंत्री प्रियंक खड़गे ने वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि शहर के सभी पब, ब्रूवरी, बार, क्लब, लाउंज और शराब परोसने वाले रेस्तरां के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।
उन्होंने कहा कि बच्चों और युवाओं को शराब तथा मादक पदार्थों के दुष्प्रभावों से बचाना सरकार की जिम्मेदारी है और किसी को भी युवाओं का भविष्य खराब करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
‘नो आईडी, नो एंट्री’ नियम होगा लागू
प्रियंक खड़गे ने स्पष्ट किया कि अब नो आईडी, नो एंट्री नियम का सख्ती से पालन कराया जाएगा। पहचान पत्र के बिना किसी भी व्यक्ति को प्रवेश नहीं दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि नाबालिगों को शराब की उपलब्धता रोकने के लिए सभी प्रतिष्ठानों को निर्धारित नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा।
युवाओं की सुरक्षा को दी जा रही प्राथमिकता
प्रियंक खड़गे को तकनीक, पारदर्शिता और युवाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देने वाले नेताओं में माना जाता है। वे साइबर अपराध, नशीले पदार्थों की रोकथाम, महिला सुरक्षा और युवाओं के स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर लगातार सक्रिय रहे हैं।
सरकार का मानना है कि नाबालिगों में शराब सेवन को रोकने के लिए प्रभावी निगरानी और कड़े नियम आवश्यक हैं।
खड़गे द्वारा जारी प्रमुख निर्देश
सरकारी मान्यता प्राप्त आयु प्रमाण पत्र की जांच अनिवार्य होगी।
21 वर्ष से कम आयु के व्यक्तियों को शराब की बिक्री या आपूर्ति पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी।
सभी प्रवेश द्वारों पर सीसीटीवी कैमरे कार्यरत होने चाहिए और उनकी फुटेज सुरक्षित रखी जानी चाहिए।
नियमों के उल्लंघन की स्थिति में संबंधित मैनेजर और लाइसेंस धारक सीधे जिम्मेदार होंगे।
नाबालिगों को शराब बेचने या परोसने पर कानूनी कार्रवाई के साथ कड़ी सजा दी जाएगी।
सार्वजनिक स्वास्थ्य को मजबूत करने की पहल
कर्नाटक सरकार की यह पहल युवाओं को नशे की लत से बचाने और सार्वजनिक स्वास्थ्य को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। सरकार का उद्देश्य नाबालिगों के बीच बढ़ती नशे की प्रवृत्ति पर रोक लगाना और सुरक्षित सामाजिक वातावरण सुनिश्चित करना है।


