नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्नातक डिग्री से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करने का निर्देश दिया गया था। न्यायमूर्ति सचिन दत्ता ने यह फैसला दिल्ली विश्वविद्यालय की याचिका पर सुनाया।
कोर्ट का फैसला
न्यायमूर्ति सचिन दत्ता ने कहा कि CIC का दृष्टिकोण पूरी तरह गलत था। अदालत ने टिप्पणी की कि किसी व्यक्ति की डिग्री या अंक पत्र को सार्वजनिक सूचना मानना सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सीधा उल्लंघन है। फरवरी में सुनवाई पूरी होने के छह महीने बाद यह आदेश सुनाया गया।
दिल्ली विश्वविद्यालय की दलील
डीयू की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि CIC का आदेश रद्द होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय को अदालत को रिकॉर्ड दिखाने में कोई आपत्ति नहीं है। डीयू ने दलील दी कि छात्रों की जानकारी न्यासिक जिम्मेदारी में रखी जाती है और केवल जिज्ञासा के आधार पर निजी सूचना नहीं मांगी जा सकती।
मामला कैसे शुरू हुआ
2016 में अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री मोदी से उनकी शैक्षिक डिग्री सार्वजनिक करने की मांग की थी। इसके बाद नीरज शर्मा नामक व्यक्ति ने RTI के तहत 1978 की सभी BA डिग्रियों की जानकारी मांगी। डीयू ने इसे निजी बताते हुए इनकार कर दिया। बाद में CIC ने दिसंबर 2016 में आदेश दिया कि डीयू 1978 में स्नातक करने वाले छात्रों की सूची सार्वजनिक करे। 2017 में डीयू ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।