‘कॉकरोचों की भी बन गई पार्टी…’ धीरेंद्र शास्त्री का बड़ा तंज, नेताओं पर भी साधा निशाना

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बद्रीनाथ में कथा के दौरान संबोधित करते बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री।
बद्रीनाथ में कथा के दौरान संबोधित करते बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री।

बद्रीनाथ: उत्तराखंड के बद्रीनाथ धाम में आयोजित कथा के दौरान बागेश्वर धाम के प्रमुख पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने देश की राजनीति, बेरोजगारी, महंगाई और नेताओं के खर्चों को लेकर कई तीखे बयान दिए। इस दौरान उन्होंने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ को लेकर भी कटाक्ष किया, जिसके बाद उनके बयान सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गए।

‘जिन कॉकरोचों से लोग डरते थे, अब उनकी भी पार्टी बन गई’

कथा के दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि भारत में अब ऐसी स्थिति हो गई है कि जिन कॉकरोचों से लोग डरते थे, अब उनकी भी पार्टी बन गई है। उन्होंने कहा कि यह देश में बढ़ती बेरोजगारी और युवाओं के घटते स्किल डेवलपमेंट की ओर इशारा करता है। उन्होंने युवाओं के रोजगार और भविष्य को लेकर चिंता जताई।

पेट्रोल-डीजल बचाने की अपील पर भी दिया बयान

धीरेंद्र शास्त्री ने पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों और ईंधन बचाने को लेकर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील से पहले ही उन्होंने अपनी गाड़ी का इस्तेमाल लगभग बंद कर दिया था। उन्होंने दावा किया कि पिछले एक महीने में उन्होंने अपनी गाड़ी में एक लीटर तेल भी खर्च नहीं किया।

नेताओं के चार्टर्ड विमानों पर उठाए सवाल

बागेश्वर बाबा ने नेताओं के खर्चों पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि आम जनता से पेट्रोल-डीजल कम इस्तेमाल करने को कहा जाता है, लेकिन नेताओं के चार्टर्ड विमानों पर रोक लगाने की बात नहीं होती। उन्होंने कहा कि सबसे ज्यादा ईंधन और पैसा नेताओं की हवाई यात्राओं में खर्च होता है।

नेताओं की सैलरी रोकने का दिया सुझाव

धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि अगर देश की आर्थिक स्थिति मजबूत करनी है तो केवल आम जनता पर बोझ डालना सही नहीं है। उन्होंने सुझाव दिया कि कुछ समय के लिए नेताओं की सैलरी भी रोक दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि देश का रुपया मजबूत करने की जिम्मेदारी सिर्फ जनता की नहीं बल्कि नेताओं की भी है।

सोशल मीडिया पर तेज हुई बहस

धीरेंद्र शास्त्री के इन बयानों के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है। समर्थक इसे आम जनता की आवाज बता रहे हैं, जबकि विरोधी इसे राजनीतिक टिप्पणी मान रहे हैं। बद्रीनाथ में दिया गया उनका बयान अब राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा का केंद्र बना हुआ है।

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