चंडीगढ़। भारतीय समाज में बेटे की चाहत और सामाजिक दबाव किस तरह एक महिला के जीवन को जोखिम में डाल देता है, इसकी बानगी हरियाणा के फतेहाबाद जिले के एक छोटे से गांव में सामने आई है। भूना क्षेत्र के ढाणी भोजराज गांव के दिहाड़ी मजदूर संजय 11 बच्चों के पिता हैं। शादी के 19 साल और 10 बेटियों के बाद उनकी पत्नी सुनीता ने एक बेटे को जन्म दिया है, जिसका नाम दिलखुश रखा गया है।
कम हीमोग्लोबिन के बावजूद 11वीं डिलीवरी
संजय ने बताया कि डॉक्टरों ने उनकी पत्नी सुनीता के हीमोग्लोबिन स्तर को लेकर चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा, “डॉक्टरों ने बताया कि मेरी पत्नी का हीमोग्लोबिन केवल पांच ग्राम रह गया था। डिलीवरी के दौरान कुछ भी गलत होने की स्थिति में जिम्मेदारी हमारी होगी, इसके लिए लिखित सहमति ली गई थी।” बेटे की चाहत को लेकर पूछे जाने पर संजय ने कहा कि उनकी बेटियों ने भाई के लिए प्रार्थना की थी।
आर्थिक स्थिति और परिवार का भरण-पोषण
संजय दिहाड़ी मजदूरी करते हैं। जी-राम-जी/मनरेगा का काम फिलहाल बंद होने के कारण इतने बड़े परिवार का पालन-पोषण चुनौती बना हुआ है। उन्होंने बताया कि अब तक मजदूरी करके परिवार को पाला है और आगे भी ऐसा करते रहेंगे। इस जोड़े की शादी वर्ष 2007 में हुई थी। पहली बेटी दो साल बाद हुई और इसके बाद 17 वर्षों में नौ और बेटियों का जन्म हुआ।
सरकारी स्कूलों में पढ़ती हैं बेटियां
संजय ने बताया कि उनकी सभी बेटियों का पालन-पोषण समान रूप से किया गया है और वे सरकारी स्कूलों में पढ़ती हैं। सबसे बड़ी बेटी 18 वर्ष की है और कक्षा 12 में अध्ययनरत है। डिलीवरी के लिए परिवार लगभग 50 किलोमीटर दूर जींद जिले के उचाना गया, जहां सुनीता को एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया।
डॉक्टरों ने बताई गंभीर स्थिति
मामले को संभालने वाले डॉक्टर नरवीर और संतोष ने बताया कि यह एक गंभीर स्थिति थी। जींद से आपातकालीन रक्त की व्यवस्था की गई और महिला की 11वीं डिलीवरी होने के बावजूद सामान्य प्रसव सफलतापूर्वक कराया गया। फिलहाल मां और बच्चा दोनों स्वस्थ हैं और उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।
सोशल मीडिया पर वायरल हुई कहानी
परिवार की कहानी सोशल मीडिया पर वायरल हो गई, खासकर एक वीडियो सामने आने के बाद, जिसमें पिता अपनी दस बेटियों के नाम याद करने में संघर्ष करते दिखाई दे रहे हैं। पितृसत्तात्मक दबाव के आरोपों को खारिज करते हुए संजय ने कहा कि आज लड़कियां हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं।
हरियाणा में लिंगानुपात में सुधार
गौरतलब है कि हरियाणा में हाल के वर्षों में लिंगानुपात में सुधार दर्ज किया गया है। वर्ष 2025 में राज्य का लिंगानुपात 923 दर्ज किया गया, जो 2024 के मुकाबले 13 अंकों की बढ़ोतरी है। अधिकारियों के अनुसार यह पिछले पांच वर्षों में सबसे अधिक है।
आंकड़ों में दिखा बदलाव
आंकड़ों के मुताबिक 2025 में हरियाणा में कुल 5,19,691 शिशुओं का जन्म हुआ, जिनमें 2,70,281 लड़के और 2,49,410 लड़कियां थीं। इससे पहले 2024 में लिंगानुपात 910 था। अधिकारियों ने इस सुधार का श्रेय प्रसव पूर्व लिंग निर्धारण और अवैध गर्भपात पर रोक के लिए किए गए कदमों को दिया है।


