जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया कि एक वयस्क महिला अपनी इच्छा से किसी भी पुरुष के साथ रह सकती है, चाहे वह शादीशुदा ही क्यों न हो। न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की खंडपीठ ने कहा कि महिला को अपने साथी और निवास स्थान चुनने का मौलिक अधिकार है और इसे अपराध नहीं माना जा सकता।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला रिट याचिका संख्या 31544/2025 से जुड़ा था, जिसमें याचिकाकर्ता ने अपनी बेटी ‘X’ की रिहाई की मांग की थी। अदालत के समक्ष पेश की गई ‘X’ ने स्पष्ट कहा कि वह अपने प्रेमी के साथ रहना चाहती है।
पक्षों की दलीलें
याचिकाकर्ता की ओर से वकील आयुष शर्मा ने तर्क दिया कि महिला को माता-पिता के पास भेजा जाना चाहिए, क्योंकि जिस व्यक्ति के साथ वह रह रही है, वह विवाहित है। वहीं राज्य की ओर से उप महाधिवक्ता अभिजीत अवस्थी ने जानकारी दी कि वह व्यक्ति अपनी पहली पत्नी से अलग हो चुका है और तलाक की प्रक्रिया में है।
न्यायालय की टिप्पणियाँ
न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन द्वारा लिखे आदेश में कहा गया कि ‘X’ एक वयस्क है और उसे यह अधिकार है कि वह किसके साथ रहना चाहती है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी शादीशुदा पुरुष के साथ रहना कानूनन अपराध नहीं है। हालांकि, यदि महिला उससे विवाह करती है, तो यह द्विविवाह की श्रेणी में आएगा और केवल पहली पत्नी ही इस पर आपत्ति दर्ज करा सकती है।
पीठ ने यह भी कहा कि नैतिकता पर टिप्पणी करना अदालत का काम नहीं है और महिला को अपनी स्वतंत्रता का प्रयोग करने का अधिकार है।
हाईकोर्ट का अंतिम आदेश
अदालत ने रिट याचिका का निपटारा करते हुए डीएसपी मनीष त्रिपाठी को निर्देश दिया कि महिला ‘X’ को रिहा किया जाए। यह रिहाई दो शर्तों पर होगी—पहली, महिला का शपथ पत्र कि वह अपनी इच्छा से साथ जा रही है; और दूसरी, पुरुष का सहमति पत्र कि उसने उसे अपनी संगति में स्वीकार कर लिया है।