भारत की सड़कों पर सफर करते समय आपने अक्सर सड़क किनारे लगे किलोमीटर पत्थर (माइलस्टोन) देखे होंगे। ये सिर्फ दूरी बताने के लिए नहीं होते बल्कि इनके ऊपर लगे रंग यह भी बताते हैं कि आप किस प्रकार की सड़क पर सफर कर रहे हैं। सड़क का सही प्रकार पहचानना न सिर्फ जानकारी के लिए जरूरी है, बल्कि यह सफर को सुरक्षित और आसान भी बनाता है।
पीला और सफेद – राष्ट्रीय राजमार्ग (NH)
अगर माइलस्टोन के ऊपरी हिस्से का रंग पीला और सफेद है तो यह दर्शाता है कि आप राष्ट्रीय राजमार्ग (National Highway) पर सफर कर रहे हैं।ये सड़कें अलग-अलग राज्यों और बड़े शहरों को जोड़ती हैं। इन पर लंबी दूरी की हाई-स्पीड यात्रा होती है। उदाहरण: दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे, NH-48।
हरा और सफेद – राज्य राजमार्ग (SH)
अगर पत्थर का ऊपरी हिस्सा हरा और सफेद है तो यह राज्य राजमार्ग (State Highway) को दर्शाता है।
- ये सड़कें एक राज्य के प्रमुख शहरों, कस्बों और जिलों को जोड़ती हैं।
- इनका रखरखाव राज्य सरकार करती है।
- उदाहरण: उत्तर प्रदेश SH-27, महाराष्ट्र SH-60।
काला और सफेद – शहर या जिला सड़क
यदि माइलस्टोन काला और सफेद है तो यह शहर या जिला स्तर की सड़क होती है।
- ये सड़कें लोकल ट्रैफिक के लिए बनाई जाती हैं।
- शहर की सीमा के भीतर या जिला मुख्यालय तक पहुंचने के लिए इनका उपयोग होता है।
नीला या नारंगी और सफेद – ग्रामीण सड़क
अगर पत्थर का रंग नीला या नारंगी और सफेद है तो यह ग्राम सड़क दर्शाता है।
- ये सड़कें प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) या पंचायत स्तर पर बनाई जाती हैं।
- इनका उद्देश्य गांवों को कस्बों और शहरों से जोड़ना है।
माइलस्टोन का इतिहास
भारत में माइलस्टोन लगाने की परंपरा ब्रिटिश शासनकाल में शुरू हुई थी।
- शुरुआती दौर में इन्हें सिर्फ दूरी मापने और यात्रा मार्ग दिखाने के लिए लगाया जाता था।
- बाद में इनके रंगों के जरिए सड़क के प्रकार की जानकारी भी दी जाने लगी।
- आज ये न सिर्फ दिशा बताते हैं बल्कि सड़क सुरक्षा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
लोगों के लिए महत्वपूर्ण जानकारी
सफर के दौरान सड़क किनारे लगे इन माइलस्टोन को देखकर आप तुरंत यह समझ सकते हैं कि आप किस तरह की सड़क पर हैं। इससे यात्रा की योजना बनाना आसान हो जाता है और सफर सुरक्षित बनता है


