OTP वेरिफिकेशन पर लगेगा शुल्क, आम जनता और स्टार्टअप्स पर असर

0
6
नए MNV नियम से OTP वेरिफिकेशन हुआ महंगा, आम जनता और स्टार्टअप्स पर असर
नए MNV नियम से OTP वेरिफिकेशन हुआ महंगा, आम जनता और स्टार्टअप्स पर असर

नई दिल्ली: ऑनलाइन धोखाधड़ी रोकने और डिजिटल सुरक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से टेलीकॉम विभाग (DoT) ने मोबाइल नंबर वेरिफिकेशन के लिए नया नियम तैयार किया है। इस मसौदा नियम के अनुसार, अब प्रत्येक OTP वेरिफिकेशन पर शुल्क लगेगा। बैंक जैसे वित्तीय संस्थानों को इसके लिए 1.5 रुपये प्रति वेरिफिकेशन और निजी कंपनियों को 3 रुपये देने होंगे।

यह शुल्क मोबाइल नंबर वैलिडेशन (MNV) प्रक्रिया के तहत लागू होगा, जिसमें कंपनियां अब मोबाइल नंबर की प्रमाणिकता सीधे डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकॉम के प्लेटफॉर्म से जांचेंगी। पहले कंपनियां अपने स्तर पर मोबाइल नंबर की पुष्टि कर सकती थीं, लेकिन अब यह विकल्प बंद हो जाएगा।

डिजिटल सेवाओं की लागत में वृद्धि की आशंका

विशेषज्ञों का मानना है कि इस नियम से डिजिटल सेवाएं महंगी हो सकती हैं। फिनटेक, ई-कॉमर्स, हेल्थटेक, एजुकेशन और डिलीवरी स्टार्टअप्स को OTP वेरिफिकेशन की प्रक्रिया में प्रतिदिन लाखों बार मोबाइल नंबर वेरिफाई करने होते हैं। अब उन पर भारी खर्च आएगा, जो वे ग्राहकों से वसूल सकते हैं या सेवा घटा सकते हैं।

सिर्फ बैंक ही नहीं, बल्कि पेटीएम, फोनपे, गूगल पे जैसे ऐप्स, डिलीवरी ऐप्स और ऑनलाइन एजुकेशन प्लेटफॉर्म भी इससे प्रभावित होंगे। कई छोटे कारोबारियों और स्टार्टअप्स के लिए यह खर्च उठाना मुश्किल होगा, जिससे नवाचार पर भी असर पड़ेगा।

ग्रामीण और कमजोर वर्गों के लिए समस्या

ग्रामीण भारत में जहां डिजिटल साक्षरता और संसाधन सीमित हैं, वहां OTP वेरिफिकेशन की प्रक्रिया पहले से ही जटिल मानी जाती है। अब शुल्क जुड़ने से यह और कठिन हो जाएगा। कुछ सेवाएं जो पहले मुफ्त थीं, अब संभवतः शुल्क सहित मिलेंगी।

सरकार का तर्क है कि इससे साइबर धोखाधड़ी, फर्जी सिम कार्ड और फेक मोबाइल नंबर के जरिए होने वाले अपराधों पर रोक लगेगी। लेकिन दूसरी ओर डिजिटल इंडिया और समावेशी विकास की राह में यह नियम एक नई दीवार बन सकता है।

अभी नियम ड्राफ्ट में, जनता से सुझाव मांगे गए

टेलीकॉम विभाग ने अभी यह नियम ड्राफ्ट के रूप में पेश किया है और 21 अगस्त तक जनता और हितधारकों से सुझाव मांगे हैं। अंतिम नियम में संशोधन की संभावना है, लेकिन अगर यह प्रस्ताव लागू हुआ तो भारत में डिजिटल सेवाओं का तरीका पूरी तरह बदल सकता है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here