PAC की रिपोर्ट में रेलवे के लिए बड़े सुझाव

0
0
भारतीय रेलवे और PAC रिपोर्ट से जुड़ी सांकेतिक तस्वीर
भारतीय रेलवे और PAC रिपोर्ट से जुड़ी सांकेतिक तस्वीर

नई दिल्ली। भारतीय रेलवे की यात्रा प्रणाली में जल्द ही बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। संसद में पेश की गई लोक लेखा समिति (Public Accounts Committee – PAC) की ताजा रिपोर्ट में ट्रेनों के संचालन की समयबद्धता और यात्रा समय को लेकर यात्रियों से जुड़े कई अहम सुझाव दिए गए हैं। इसमें RAC टिकट धारकों को आंशिक रिफंड और सुपरफास्ट ट्रेनों की परिभाषा में बदलाव प्रमुख हैं।

RAC टिकट पर पूरा किराया वसूलने पर सवाल

संसदीय समिति ने RAC टिकट पर यात्रा करने वाले यात्रियों को लेकर सवाल उठाया है। समिति का कहना है कि जिन यात्रियों को RAC टिकट पर कन्फर्म बर्थ नहीं मिलती, उनसे पूरा किराया वसूलना उचित नहीं है। रिपोर्ट में कहा गया है कि चार्ट बनने के बाद भी अगर यात्री RAC में ही रहते हैं और उन्हें पूरी बर्थ नहीं मिलती, तो उनसे पूरा किराया नहीं लिया जाना चाहिए।

आंशिक रिफंड का सुझाव

PAC ने सुझाव दिया है कि ऐसे यात्रियों को किराए का कुछ हिस्सा वापस किया जाए। फिलहाल भारतीय रेलवे में RAC टिकट बुक करते समय पूरा किराया लिया जाता है और टिकट कन्फर्म न होने की स्थिति में दो यात्रियों को एक ही बर्थ साझा करनी पड़ती है। समिति ने इसे यात्रियों के साथ अन्याय बताते हुए रेलवे मंत्रालय से रिफंड मैकेनिज्म तैयार करने को कहा है।

सुपरफास्ट ट्रेनों की स्पीड पर नाराजगी

PAC ने सुपरफास्ट ट्रेनों की परिभाषा को लेकर भी नाराजगी जताई है। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2007 में सुपरफास्ट ट्रेनों के लिए 55 किलोमीटर प्रति घंटा की औसत गति तय की गई थी, जिसे समिति ने कम बताया है। कुल 478 सुपरफास्ट ट्रेनों में से 123 ट्रेनों की गति तय मानक से कम पाई गई।

स्पीड बढ़ाने की सिफारिश

समिति ने कहा कि कम गति के बावजूद ट्रेनों को सुपरफास्ट बनाए रखना अतिरिक्त किराया वसूलने जैसा है। PAC ने सुझाव दिया है कि सुपरफास्ट ट्रेनों की औसत गति का मानक बढ़ाकर लगभग 100 किलोमीटर प्रति घंटा किया जाए और वर्ष 2030 तक पूरे सफर में एक समान गति हासिल करने की दिशा में काम किया जाए।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here