नई दिल्ली: कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा बेंगलुरु सेंट्रल लोकसभा सीट के अंतर्गत आने वाले एक विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियों का खुलासा एक नए विवाद का कारण बन गया है।
महादेवपुरा में सबसे बड़ी बढ़त, बाकी जगह कांग्रेस आगे
पिछले छह महीनों में कांग्रेस टीम ने महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में कई स्तर पर हुई गड़बड़ियों को उजागर करने के लिए जो मेहनत की, वह चुनाव आयोग (ईसी) की निष्पक्षता पर सवाल उठाने वाले उनके लगातार चल रहे अभियान का हिस्सा है।

दिलचस्प बात यह है कि महादेवपुरा वही एकमात्र विधानसभा क्षेत्र है, जहां से भाजपा ने 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को हराते हुए चौंकाने वाली और अपराजेय बढ़त हासिल की, जबकि उसी संसदीय क्षेत्र के बाकी सात विधानसभा क्षेत्रों में उसे कांग्रेस से हार का सामना करना पड़ा।
राहुल गांधी का आरोप: वोट चोरी का ‘मॉडल’
गांधी ने महादेवपुरा में मतदाता सूची में फर्जी विवरण, दोहराव, फर्जी पते और फ़ॉर्म 6 के दुरुपयोग का हवाला देते हुए कहा कि चुनाव आयोग भाजपा के इशारे पर काम कर रहा है और निष्पक्ष नहीं है।
उन्होंने महादेवपुरा की घटनाओं को ‘वोट चोरी’ का एक ‘मॉडल’ बताया और दावा किया कि यही तरीका अन्य राज्यों में भी अपनाया जा सकता है। हरियाणा और महाराष्ट्र का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि लोकसभा में अच्छा प्रदर्शन होने के बावजूद विधानसभा में हारने पर कांग्रेस का शक और गहरा हुआ।

चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया पर सवाल
चुनाव आयोग ने राहुल गांधी से शपथ लेकर आरोप लगाने की बात कही, लेकिन अब तक कोई आधिकारिक जांच की घोषणा नहीं की गई है। कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि आयोग विपक्ष की मांगों को नजरअंदाज कर रहा है।
ईवीएम नहीं, आयोग की निष्पक्षता पर बहस
राहुल गांधी ने कहा कि अब बहस ईवीएम या बैलेट पर नहीं, बल्कि चुनाव आयोग की स्वतंत्रता पर है। उन्होंने मांग की कि आयोग मतदाता सूची के डिजिटल रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक करे।
कांग्रेस की मांगें और आयोग का रवैया
कांग्रेस ने पहले भी मतदान केंद्रों की सीसीटीवी फुटेज मांगी थी, लेकिन चुनाव आयोग ने यह कहते हुए इनकार कर दिया कि इससे अनावश्यक विवाद होगा। सुप्रीम कोर्ट के सुझावों पर भी आयोग की नाराजगी सामने आई है।
निष्पक्षता बहाल करना चुनाव आयोग की ज़िम्मेदारी
राहुल गांधी ने कहा कि अब गेंद आयोग के पाले में है। यदि वह इन आरोपों का वैज्ञानिक और शांतिपूर्ण समाधान नहीं देता, तो उसकी निष्पक्षता पर जनता का विश्वास डगमगा सकता है।