जयपुर। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने विधानसभा में एप्रोप्रिएशन बिल पर बहस का जवाब देते हुए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। राज्य की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने के उद्देश्य से तीन शहरों के नाम बदलने का ऐलान किया गया है।
पर्यटन स्थल माउंट आबू का नाम अब आबूराज, जहाजपुर का नाम यज्ञपुर और कामां का नाम कामवन करने की घोषणा की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह निर्णय स्थानीय जनभावनाओं और ऐतिहासिक तथ्यों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
रोजगार और भर्ती को लेकर बड़े फैसले
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार 4 लाख सरकारी नौकरियों के अपने संकल्प को पूरा करने की दिशा में तेजी से कार्य कर रही है। युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए नया भर्ती कैलेंडर जारी किया जाएगा तथा निजी क्षेत्र में भी रोजगार सृजन पर जोर दिया जाएगा। भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और गति सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं।
सामाजिक सुरक्षा पेंशन में वृद्धि
सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करते हुए पेंशन राशि में ₹125 की अतिरिक्त वृद्धि की घोषणा की गई है। अब पात्र लाभार्थियों को ₹1425 प्रतिमाह पेंशन मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह निर्णय बुजुर्गों और वंचित वर्ग को आर्थिक संबल प्रदान करेगा।
निर्माण श्रमिकों के लिए एकमुश्त सहायता
निर्माण श्रमिकों के कल्याण के लिए सरकार ने बड़ा निर्णय लिया है। अब श्रमिक की मृत्यु होने पर परिजनों को सहायता राशि एकमुश्त दी जाएगी। पहले यह राशि किस्तों में मिलने से परिवारों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।
जयपुर मेट्रो विस्तार और बुनियादी ढांचा विकास
राज्य में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए जयपुर मेट्रो के 80 किलोमीटर लंबे नए चरण का कार्य शुरू करने की घोषणा की गई है। द्रव्यवती नदी पर एलिवेटेड रोड के लिए डीपीआर तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। परिवहन सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए 300 नई रोडवेज बसें खरीदी जाएंगी।
ग्रामीण सड़कों के विकास हेतु मिसिंग लिंक सड़कों पर ₹500 करोड़ अतिरिक्त खर्च किए जाएंगे तथा पंचायतों को विकास कार्यों के लिए ₹9200 करोड़ का आवंटन किया जाएगा।
राज्य की आर्थिक स्थिति पर जोर
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य की प्रति व्यक्ति आय में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है और राजकोषीय घाटा एफआरबीएम अधिनियम के मानकों के अनुरूप नियंत्रित रखा गया है। विकास कार्यों को गति देने के लिए पूंजीगत व्यय हेतु ₹1 लाख करोड़ से अधिक का प्रावधान किया गया है।


