जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ ने पंचायत और निकाय चुनाव शीघ्र कराने के एकलपीठ के आदेश पर रोक लगा दी है। जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संजीत पुरोहित ने यह फैसला राज्य सरकार की अपील पर सुनवाई करते हुए दिया। इसके साथ ही प्रशासकों को हटाने के आदेश पर भी अंतरिम रोक लगा दी गई है।
सरकार की अपील पर खंडपीठ का आदेश
राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता कपिल प्रकाश गुप्ता और राजेंद्र प्रसाद ने दलील दी कि कोविड-19 महामारी के कारण पंचायत चुनाव तीन चरणों में हुए थे। इस वजह से विभिन्न पंचायतों का कार्यकाल अलग-अलग समय पर समाप्त हो रहा है। सरकार चाहती है कि सभी पंचायतों के चुनाव एक साथ कराए जाएं। इसी कारण कार्यकाल पूरा कर चुके सरपंचों को अस्थायी प्रशासक नियुक्त किया गया था।
एकलपीठ का 18 अगस्त का फैसला
गौरतलब है कि 18 अगस्त 2025 को हाईकोर्ट की एकलपीठ ने राज्य सरकार को ग्राम पंचायतों और शहरी निकायों के चुनाव जल्द कराने का आदेश दिया था। साथ ही, जिन पंचायतों का कार्यकाल पूरा हो चुका है वहां शीघ्र चुनाव कराने और हटाए गए पूर्व सरपंचों को प्रशासक के रूप में बहाल करने के निर्देश दिए थे।
भजनलाल सरकार की दलील
भजनलाल सरकार ने खंडपीठ में कहा कि हटाए गए प्रशासकों को कोई विधिक क्षति नहीं हुई है क्योंकि नए चुनाव के बाद उन्हें वैसे भी हट जाना था। इसके अलावा, कुछ प्रशासकों को शिकायतों के आधार पर पद से हटाया गया था। सरकार का कहना है कि एकलपीठ ने जल्दी चुनाव कराने और प्रशासकों की बहाली जैसे आदेश बिना उचित सुनवाई के दिए, इसलिए उन्हें रद्द किया जाना चाहिए।
अगली सुनवाई
खंडपीठ ने मामले की सुनवाई पूरी कर ली है और अंतिम फैसला बाद में सुनाया जाएगा। इससे पहले, शुक्रवार को इस अपील पर सुनवाई टाल दी गई थी। राज्य सरकार की मंशा है कि सभी पंचायत चुनाव एक साथ कराए जाएं ताकि प्रशासनिक व्यवस्था सुचारू रूप से चल सके।