जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने सरकार को बड़ा झटका देते हुए स्पष्ट कर दिया है कि परिसीमन के नाम पर निकाय और पंचायत चुनावों को अनिश्चितकाल तक टालना संभव नहीं है। अदालत ने प्रशासकों को हटाने के आदेश को निरस्त करते हुए सरकार को जल्द से जल्द चुनाव कराने के निर्देश दिए हैं। यह फैसला प्रदेश की 17 पंचायतों से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान आया।
सिंगल बेंच का आदेश
जस्टिस अनूप कुमार ढंड की सिंगल बेंच ने भिनाय ग्राम पंचायत की प्रशासक डॉ. अर्चना सुराणा व अन्य की याचिका पर सुनवाई की। इस दौरान याचिकाकर्ता की ओर से एडवोकेट लक्ष्मीकांत शर्मा मालपुरा ने पैरवी की। अदालत ने कहा कि सरकार को तत्काल निकाय चुनाव करवाने होंगे और परिसीमन की आड़ में चुनावों को टाला नहीं जा सकता।
परिसीमन पर कोर्ट की टिप्पणी
हाईकोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि परिसीमन का कार्य निकायों के भंग होने से पहले या छह महीने बाद तक पूरा होना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अदालत ने साफ किया कि निकायों का कार्यकाल समाप्त होने के छह महीने के भीतर चुनाव होना अनिवार्य है। ऐसा नहीं होने से स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित होती है। आदेशों की प्रति राज्य निर्वाचन आयोग और मुख्य सचिव को भेज दी गई है।
दिसंबर तक चुनाव कराने की तैयारी
इसी बीच, यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा पहले ही कह चुके हैं कि दिसंबर 2025 तक प्रदेश में निकाय चुनाव कराए जाएंगे। मंत्री ने बताया था कि नगर निकायों का पुनर्सीमांकन पूरा हो चुका है और वार्डों का पुनर्सीमांकन भी जल्द ही नोटिफिकेशन के जरिए घोषित किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा था कि वर्तमान में 312 नगर निकाय हैं, लेकिन जयपुर, जोधपुर और कोटा में नगर निगमों के एकीकरण के बाद यह संख्या घटकर 309 रह जाएगी।