बाड़मेर। राजस्थान के एक किसान दंपति, जो पारंपरिक खेती के साथ औषधीय फसलों की खेती और आधुनिक पशुपालन करते हैं, को स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम में लाल किला पर विशेष अतिथि के तौर पर बुलाया गया है। इसके अलावा, राज्य के सीमावर्ती गांवों के चार ग्राम प्रधानों (सरपंचों) को भी 15 अगस्त को लाल किले पर आयोजित होने वाले राष्ट्रीय स्वतंत्रता दिवस समारोह में विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया है।
औषधीय खेती करता है किसान दंपति
बाड़मेर जिले की बाटाडू तहसील के देवाराम पंवार और उनकी पत्नी धापू को पारंपरिक खेती को औषधीय फसलों और आधुनिक पशुपालन के साथ जोड़ने और इसमें सफलता हासिल करने के लिए यह सम्मान मिला है। पंवार ने बताया कि केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का प्रभावी ढंग से लाभ उठाकर उन्होंने अपनी आय बढ़ाई है और अन्य किसानों के साथ जानकारी साझा करके उन्हें नई तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया है। सरकार जोधपुर से दिल्ली तक उनकी हवाई यात्रा की व्यवस्था करेगी।
ये दोनों किसान पति-पत्नी कई साल से पारंपरिक और औषधीय दोनों प्रकार की फसलों की खेती के साथ-साथ उन्नत पशुपालन पद्धतियों को भी अपना रहे हैं। पंवार के अनुसार, वह सीमावर्ती जिले में गुग्गुल (कॉमिफोरा वाइटी) की खेती करने वाले एकमात्र किसान हैं और राष्ट्रीय पशुधन मिशन के तहत राज्य के पहले लाभार्थी भी हैं।
प्रेरणा बने किसान दंपति
औषधीय फसलों की पैदावार और आधुनिक पशुपालन तकनीकों ने देश भर के किसानों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। उन्होंने न केवल अपनी आय बढ़ाई है, बल्कि अपने अनुभव और ज्ञान को अन्य किसानों के साथ साझा करके उनकी कमाई बढ़ाने में भी योगदान दिया है।
ये मेहमान भी होंगे शामिल
भारत सरकार के वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम 2.0 में पहली बार राजस्थान के सीमावर्ती गांवों के चार सरपंच भी शामिल होंगे। इनमें म्याजलार (जैसलमेर) की गीता कंवर, नवातला भाखासर (बाड़मेर) के भरत राम, कंवरपुरा (श्रीगंगानगर) की शकुंतला और खाजूवाला तहसील (बीकानेर) के 22 केवाईडीपी गांव की सजना शामिल हैं। सरकार जोधपुर से दिल्ली तक उनकी हवाई यात्रा की व्यवस्था करेगी।
इसके अलावा लखपति दीदियों को भी विशेष मेहमान के तौर पर दिल्ली बुलाया गया है। इनमें अधिकतर यूपी की लखपति दीदियां हैं, जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य कर सरकार का ध्यान आकर्षित किया है।