भाकरवास से बिलाड़ा भडेर तक की आस्था भरी यात्रा
पुना बाबा जी का जन्म भाकरवास गांव के बेरा निंबड़िया में रावतराम जी सानपरा के घर हुआ था। जन्म से ही उनके पैर अंदर की ओर मुड़े हुए थे, जिसे देखकर उनके माता-पिता चिंतित हो गए। वे यह सोचकर व्याकुल थे कि उनके पुत्र का भविष्य क्या होगा। लेकिन उन्होंने श्रद्धा रखते हुए यह संकल्प लिया कि यदि उनके बेटे के पैर ठीक हो गए तो वे उसे आई माता जी के भडेर, बिलाड़ा में भेंट कर देंगे।
आई माता जी का अद्भुत चमत्कार
समय बीतने के साथ ही पुना बाबा जी के पैर धीरे-धीरे ठीक होते गए। जब वे पूरी तरह से स्वस्थ हो गए, तो उनके माता-पिता ने अपने वचन के अनुसार उन्हें आई माता जी के भडेर, बिलाड़ा में भेंट कर दिया। कुछ समय बाद पुना बाबा जी वापस अपने गांव भाकरवास लौट आए।
जैसे ही वे अपने घर पहुंचे, एक चमत्कार हुआ—उनके पैर फिर से पहले जैसे अंदर की ओर मुड़ गए। यह देखकर उनके माता-पिता को आई माता जी की महिमा का साक्षात्कार हुआ। उन्होंने पुनः पुना बाबा जी को माता जी के भडेर में भेंट किया। इस बार फिर वही अद्भुत चमत्कार हुआ—उनके पैर सीधे हो गए और वे सामान्य रूप से चलने लगे।
75 वर्षों से कर रहे हैं माता जी की सेवा
यह चमत्कार देखकर पुना बाबा जी ने तन, मन और धन से आई माता जी की सेवा करने का संकल्प लिया। वे शोभा बाबा जी के शिष्य हैं और पहले बिलाड़ा भडेर में मुख्य पुजारी रहे। पिछले 25 वर्षों से वे आई माता धर्मरथ भैल के साथ निरंतर माता जी की भक्ति में लीन हैं।
आज भी पुना बाबा जी की पवित्र उपस्थिति को लोग माता जी के आशीर्वाद का प्रतीक मानते हैं। कहा जाता है कि जहां उनके पांव पड़ते हैं, वहां सुख-समृद्धि आ जाती है, परिवार के संकट दूर हो जाते हैं, और घर का वातावरण पवित्रता से भर जाता है। आई माता जी की कृपा से वे लाखों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र बने हुए हैं।
आई माता जी का चमत्कार आज भी मौजूद
आई माता जी की यह महिमा सदियों से चली आ रही है और पुना बाबा जी इसका जीवंत प्रमाण हैं। जो भी श्रद्धा और भक्ति से आई माता जी की आराधना करता है, उसके सभी कष्ट समाप्त हो जाते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि प्राप्त होती है।