मांड लोकगायिका गवरी देवी का 98 वर्ष की उम्र में निधन

0
22

पाली। राजस्थान की स्वर साधिका और मांड लोकगायिकी की पहचान मानी जाने वाली गवरी देवी का 98 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने पाली स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। उनके निधन पर प्रदेश के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उप मुख्यमंत्री दीया कुमारी सहित कई नेताओं ने शोक व्यक्त किया है।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने जताया शोक

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि, “पाली की सुप्रसिद्ध मांड गायिका गवरी देवी जी के निधन का समाचार अत्यंत दुखद है। उनका जाना लोक संगीत जगत एवं राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत के लिए अपूरणीय क्षति है। अपनी मधुर स्वर साधना और लोकगीतों के माध्यम से उन्होंने राजस्थान की समृद्ध लोक संस्कृति को नई पहचान दी। लोककला के संरक्षण और संवर्धन में उनका अमूल्य योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।

उन्होंने कहा कि उनकी सुरमयी विरासत आने वाली पीढ़ियों को निरंतर प्रेरित करती रहेगी। ईश्वर दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें तथा शोकाकुल परिजनों और उनके प्रशंसकों को यह दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करें। ॐ शांति।”

उप मुख्यमंत्री दीया कुमारी ने भी व्यक्त की संवेदनाएं

उप मुख्यमंत्री दीया कुमारी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि, “राजस्थान की समृद्ध लोक संस्कृति और मांड गायिकी को अपनी सुमधुर आवाज़ से देश-विदेश में विशिष्ट पहचान दिलाने वाली सुप्रसिद्ध लोक गायिका गवरी देवी जी के निधन का समाचार अत्यंत दुःखद है। उनका जीवन राजस्थान की लोक कला, संगीत और संस्कृति के प्रति समर्पण का अनुपम उदाहरण रहा है।

ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें तथा शोकाकुल परिजनों, प्रशंसकों एवं कला प्रेमियों को यह दुःख सहन करने की शक्ति दें। ॐ शांति।”

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जताया दुख

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि, “मांड गायकी को दुनिया में लोकप्रिय बनाने में अहम योगदान देने वाली सुप्रसिद्ध गायिका गवरी देवी जी के निधन पर मेरी गहरी संवेदनाएं हैं। अनेक दशकों तक उन्होंने मांड गायन किया तथा इस लोककला का पर्याय बनीं। उनके निधन से राजस्थान के कला एवं संस्कृति क्षेत्र को अपूरणीय क्षति हुई है। ईश्वर से उनकी आत्मा की शांति तथा शोक संतप्त परिवार को धैर्य एवं संबल प्रदान करने की प्रार्थना करता हूं।”

साधारण जीवनशैली के लिए भी जानी जाती थीं गवरी देवी

गवरी देवी करीब आठ दशकों तक अपनी लोकगायिकी के माध्यम से देश-विदेश में पहचान बनाती रहीं। मरू कोकिला के नाम से प्रसिद्ध गवरी देवी का जन्म बाड़मेर जिले के कोरण गांव में एक कलाकार परिवार में हुआ था।

भारत सरकार ने वर्ष 1975-76 में उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया था। वर्ष 2013 में राजस्थान सरकार ने उन्हें राजस्थान रत्न सम्मान प्रदान किया। इसके अलावा उन्हें राजस्थान संगीत नाटक अकादमी सम्मान और लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड सहित कई प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त हुए।

नई पीढ़ी को दे रही थीं लोकगायिकी की शिक्षा

आधुनिक संगीत के दौर में भी गवरी देवी लोकगायिकी के संरक्षण और संवर्धन के लिए लगातार कार्य कर रही थीं। वह अपनी आने वाली पीढ़ी को लोक संगीत की शिक्षा दे रही थीं। उनकी बहू सुंदर देवी और पोतियां गंगा एवं नीतू इस विरासत को आगे बढ़ा रही हैं।

admin
Author: admin

News

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here