जंतर-मंतर पर आरक्षण विरोधी प्रदर्शन, देर रात पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया

0
65
दिल्ली के जंतर-मंतर पर आरक्षण व्यवस्था के विरोध में प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई
दिल्ली के जंतर-मंतर पर आरक्षण व्यवस्था के विरोध में प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई

नई दिल्ली: देश में जारी जाति-आधारित आरक्षण व्यवस्था के विरोध में जंतर-मंतर पर शुक्रवार को प्रदर्शन किया गया। बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचे और आरक्षण व्यवस्था में बदलाव तथा समीक्षा की मांग उठाई।

रात में भीड़ बढ़ने के बाद दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) मौके पर पहुंची। पुलिस ने जंतर-मंतर पर मौजूद प्रदर्शनकारियों को वहां से हटाया और कई लोगों को हिरासत में लेकर बसों के जरिए ले जाया गया।

शांतिपूर्ण प्रदर्शन का दावा

प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वे आरक्षण व्यवस्था और UGC से जुड़े मुद्दों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे। कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के बावजूद पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया।

प्रदर्शन में पहुंचे लोगों के हाथों में तिरंगा, बैनर, पोस्टर और विभिन्न संगठनों के झंडे दिखाई दिए। प्रदर्शनकारी जातिगत आरक्षण और कुछ नीतिगत मुद्दों के खिलाफ नारेबाजी करते नजर आए।

शाम 4 बजे तक थी अनुमति

जानकारी के अनुसार, इस प्रदर्शन के लिए दिल्ली पुलिस की ओर से शाम 4 बजे तक की अनुमति दी गई थी। समय सीमा समाप्त होने के बाद भी लोगों के जंतर-मंतर पर मौजूद रहने पर पुलिस ने कार्रवाई शुरू की।

दूसरी ओर, 21 अगस्त को प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर पुलिस ने नई दिल्ली क्षेत्र में BNSS की धारा 163 के तहत लागू निषेधाज्ञा का हवाला देते हुए लोगों को एकत्र होने से रोकने की बात कही थी।

इंस्टाग्राम पेज से की गई थी अपील

इस प्रदर्शन के लिए सोशल मीडिया पर सक्रिय ‘आरक्षण हटाओ आंदोलन’ नाम के एक इंस्टाग्राम पेज के माध्यम से लोगों से जंतर-मंतर पहुंचने की अपील की गई थी।

पुलिस ने सोशल मीडिया पर प्रदर्शन की अनुमति से संबंधित कुछ दावों को भ्रामक बताया और प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर से हटाकर अन्य निर्धारित स्थानों की ओर जाने के निर्देश दिए।

मौजूदा आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा की मांग

प्रदर्शन में शामिल लोगों का कहना था कि सरकारी सहायता और अन्य सुविधाएं तय करते समय आर्थिक स्थिति को भी प्रमुख आधार बनाया जाना चाहिए। उनका तर्क था कि सहायता वास्तविक जरूरतमंद लोगों तक पहुंचनी चाहिए।

कुछ प्रदर्शनकारियों ने मौजूदा जातिगत आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा कराने और यह जांच करने की मांग की कि इसका लाभ समाज के किन वर्गों तक पहुंच रहा है।

क्रीमी लेयर और ‘कोटे के अंदर कोटा’ की मांग

प्रदर्शनकारियों के एक वर्ग ने अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग से संबंधित आरक्षण नीतियों की समीक्षा की मांग भी उठाई।

कुछ लोगों ने आरक्षण व्यवस्था में ‘क्रीमी लेयर’ और ‘कोटे के अंदर कोटा’ जैसे प्रावधानों पर चर्चा और नीतिगत समीक्षा की मांग की। एक प्रदर्शनकारी ने सरकार से श्वेत पत्र जारी कर आरक्षण व्यवस्था के प्रभाव का विस्तृत आकलन सार्वजनिक करने की मांग की।

सुल्तानपुर में भी उठा आरक्षण समीक्षा का मुद्दा

उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में भी विभिन्न संगठनों ने आरक्षण समीक्षा और सवर्ण आयोग के गठन की मांग को लेकर प्रदर्शन किया।

प्रदर्शनकारियों ने जातिगत आरक्षण की जगह आर्थिक आधार को प्राथमिकता देने, आरक्षण नीतियों की समय-समय पर समीक्षा करने और सरकारी सहायता को वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचाने की मांग रखी।

प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें

प्रदर्शन में शामिल समूहों की प्रमुख मांगों में जातिगत आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा, आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए सहायता, सवर्ण आयोग के गठन और आरक्षण नीतियों के प्रभाव का पुनर्मूल्यांकन शामिल रहा।

प्रदर्शनकारियों का यह भी कहना था कि शिक्षा, छात्रवृत्ति, कोचिंग और अन्य सरकारी सहायता जरूरत और आर्थिक स्थिति के आधार पर वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंचनी चाहिए।

admin
Author: admin

News

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here