
Mahatvapoorna @ बेंगलूरु: गुरु कृपा सेवा समिति के तत्वावधान में माहेश्वरी भवन में संत राजाराम के सानिध्य में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन कथावाचक संत कृपाराम ने भगवान विष्णु के परम भक्त ध्रुव के जीवन चरित्र का वर्णन किया।
कथा के दौरान संत कृपाराम ने कहा कि प्रभु की कृपा पाने के लिए उम्र नहीं, बल्कि सच्ची श्रद्धा, दृढ़ संकल्प और समर्पण आवश्यक है।
ध्रुव ने कठिन परिस्थितियों में नहीं मानी हार
संत कृपाराम ने बताया कि बालक ध्रुव अपनी सौतेली माता के वचनों से आहत हुए थे, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने श्रीहरि की प्राप्ति का संकल्प लिया और वन में जाकर कठोर तपस्या की।
उनकी अटूट श्रद्धा और तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें दर्शन दिए और आशीर्वाद प्रदान किया।
सच्ची श्रद्धा और समर्पण से मिलती है प्रभु की कृपा
संत ने कहा कि ध्रुव का जीवन हमें सिखाता है कि मनुष्य दृढ़ संकल्प, श्रद्धा और विश्वास के साथ भगवान का स्मरण करे तो कठिन परिस्थितियों में भी सफलता प्राप्त कर सकता है।
बालक ध्रुव ने छोटी उम्र में ही यह सिद्ध कर दिया कि भगवान की भक्ति के लिए उम्र नहीं, बल्कि सच्ची श्रद्धा और समर्पण आवश्यक है।
ध्रुव चरित्र सुनकर भावुक हुए श्रद्धालु
कथा के दौरान ध्रुव चरित्र के प्रसंगों का वर्णन सुनकर श्रद्धालु भावुक हो गए।
भजनों और भगवान के जयकारों से माहौल भक्तिमय हो गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण किया।
कथावाचक संत कृपाराम का किया सम्मान
श्रीमद्भागवत कथा के दौरान श्रद्धालुओं ने कथावाचक संत कृपाराम का सम्मान किया।
गुरु कृपा सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित कथा में श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव के साथ सहभागिता की।

