
नोएडा: नोएडा में CJP आंदोलन में शामिल गौतमबुद्ध यूनिवर्सिटी के छात्र अक्षत त्रिपाठी को 5 लाख रुपये के निजी मुचलके का नोटिस जारी करने वाले एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट-III डॉ. रवि शंकर मिश्रा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को इस प्रशासनिक कार्रवाई की जानकारी दी।
सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी के बाद कार्रवाई
मामला भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धाराओं के तहत अक्षत त्रिपाठी को जारी किए गए 5 लाख रुपये के शांति बंधपत्र के नोटिस से जुड़ा है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस कार्रवाई पर कड़ी नाराजगी जताई थी। अदालत ने सवाल उठाया कि छात्रों के खिलाफ जबरन या दंडात्मक कार्रवाई पर रोक के बावजूद संबंधित मजिस्ट्रेट ने नोटिस कैसे जारी किया।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अनदेखी पर सवाल
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान अधिकारियों के रवैये पर सवाल उठाए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कोई भी अधिकारी न्यायालय के आदेश से ऊपर नहीं है।
सुनवाई से पहले सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि संबंधित मजिस्ट्रेट को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। गुरुवार को प्रशासनिक कार्रवाई की औपचारिक जानकारी भी पीठ को दी गई।
अक्षत को 5 लाख रुपये के बंधपत्र का नोटिस
गौतमबुद्ध यूनिवर्सिटी के छात्र अक्षत त्रिपाठी को ग्रेटर नोएडा के तृतीय एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट कार्यालय की ओर से BNSS की धारा 130 के तहत 5 लाख रुपये का शांति बंधपत्र भरने का नोटिस जारी किया गया था।
पुलिस का आरोप था कि 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बैनर तले हुए प्रदर्शन में अक्षत ने अन्य छात्रों को भड़काकर शामिल किया, जिससे इलाके में तनाव और शांतिभंग की आशंका बनी।
अक्षत ने आरोपों से किया इनकार
अक्षत त्रिपाठी ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा था कि वह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक विरोध का हिस्सा बने थे। सुप्रीम कोर्ट पहले ही आंदोलन में शामिल छात्रों को परेशान न करने का निर्देश दे चुका था।
मामले से जुड़ी सुप्रीम कोर्ट की कार्रवाई के बाद प्रशासन ने पहले नोटिस रद्द किया और अब संबंधित एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट डॉ. रवि शंकर मिश्रा को निलंबित कर दिया गया है।
डॉ. रवि शंकर मिश्रा की तैनाती
डॉ. रवि शंकर मिश्रा PPS 2018 बैच के अधिकारी हैं। उनकी भर्ती 31 मई 2021 को हुई थी और वे मूल रूप से उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ के रहने वाले हैं।
उन्होंने Ph.D की शैक्षणिक योग्यता हासिल की है और वर्तमान में पुलिस कमिश्नरेट गौतमबुद्ध नगर में ACP/एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (तृतीय) के पद पर तैनात थे।
मामले में छात्र आंदोलन और सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लेकर अदालत की सख्ती के बाद प्रशासनिक कार्रवाई की गई है।

