जयपुर। जयपुर ग्रामीण के दूदू इलाके में स्थित भैराना धाम एक बार फिर बड़े आंदोलन का केंद्र बन गया। दादू पंथ की इस तपोस्थली पर रीको और प्रस्तावित औद्योगिक परियोजनाओं के विरोध में विशाल महापंचायत आयोजित हुई, जिसमें साधु-संतों, ग्रामीणों और बड़ी संख्या में महिलाओं ने भाग लिया। आंदोलन स्थल “रीको हटाओ, भैराना धाम बचाओ” के नारों से गूंजता रहा और देर रात तक प्रशासन तथा आंदोलनकारियों के बीच हलचल बनी रही।
सरकार को चेतावनी, जयपुर कूच की दी गई चेतावनी
महापंचायत में पहुंचे Hanuman Beniwal ने मंच से सरकार को सीधा अल्टीमेटम दिया। उन्होंने कहा कि साधु-संतों और ग्रामीणों की धार्मिक भावनाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने साफ कहा कि यदि सरकार ने रीको परियोजना वापस नहीं ली तो आंदोलन और बड़ा होगा। इसी दौरान जयपुर कूच की चेतावनी भी दी गई। हालांकि बाद में सहमति बनने के बाद जयपुर कूच स्थगित कर दिया गया।
धार्मिक आस्था और पर्यावरण को लेकर बढ़ा विरोध
भैराना धाम की जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया को लेकर साधु-संतों और ग्रामीणों में गहरी नाराजगी देखने को मिली। आंदोलनकारियों का कहना है कि यह केवल जमीन का मामला नहीं, बल्कि आस्था, संत परंपरा और प्रकृति से जुड़ा विषय है। महापंचायत में कई संतों ने आरोप लगाया कि विकास के नाम पर हजारों पेड़ काटे जा रहे हैं, जिससे वन्यजीवों का आशियाना भी प्रभावित हो सकता है।
ग्रामीणों ने भी मंच से अपनी बात रखते हुए कहा कि भैराना धाम केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि पूरे इलाके की सांस्कृतिक पहचान है। लोगों का कहना था कि औद्योगिक परियोजना से पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ सकता है और आने वाले समय में इसका असर पूरे क्षेत्र पर पड़ेगा। महापंचायत में पर्यावरण संरक्षण और धार्मिक विरासत बचाने की मांग प्रमुख मुद्दा बनी रही।


