बेंगलुरु: कर्नाटक की राजनीति में गुरुवार को बड़ा सियासी बदलाव देखने को मिला। कांग्रेस सरकार में जारी लंबे समय से चल रही अंदरूनी राजनीतिक हलचल के बीच मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसकी घोषणा करते हुए कहा कि उन्होंने अपना इस्तीफा राज्यपाल के सचिव को सौंप दिया है और पार्टी आलाकमान के निर्देश का पालन किया है।
तय समय से छह महीने ज्यादा रहे मुख्यमंत्री
सिद्धारमैया ढाई-ढाई साल के सत्ता समझौते के तहत तय समय से करीब छह महीने अधिक मुख्यमंत्री पद पर बने रहे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व ने उनसे दो दिन पहले इस्तीफा देने को कहा था और उन्होंने उसी के अनुसार पद छोड़ दिया।
राज्यसभा जाने का प्रस्ताव ठुकराया
इस्तीफे के बाद सिद्धारमैया ने स्पष्ट किया कि उनकी सक्रिय राजनीति अभी खत्म नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि पार्टी नेतृत्व ने उन्हें राज्यसभा भेजने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि उनकी रुचि राष्ट्रीय राजनीति में नहीं है और वह कर्नाटक की राजनीति में ही सक्रिय रहना चाहते हैं।
कांग्रेस नेतृत्व के निर्देश पर दिया इस्तीफा
उन्होंने कहा कि उन्होंने पहले भी स्पष्ट किया था कि जब हाईकमान उनसे इस्तीफा मांगेगा, वह तुरंत पद छोड़ देंगे। सिद्धारमैया ने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व के निर्देश के बाद उन्होंने अपना इस्तीफा राजभवन कार्यालय में जमा करा दिया क्योंकि राज्यपाल उस समय बेंगलुरु में मौजूद नहीं थे।
सरकार की स्थिरता पर असर नहीं पड़ेगा
सिद्धारमैया ने विश्वास जताया कि नेतृत्व परिवर्तन के बावजूद सरकार स्थिर बनी रहेगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के पास 136 विधायक हैं और दो निर्दलीय विधायकों का समर्थन भी सरकार को प्राप्त है। उन्होंने कहा कि पूर्ण बहुमत होने के कारण सरकार पर किसी तरह का खतरा नहीं है।


