रेप केस में पूर्व सांसद प्रज्वल रेवन्ना को उम्रकैद, ₹10 लाख का जुर्माना

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बेंगलुरु कोर्ट में सजा सुनते समय प्रज्वल रेवन्ना हाथ जोड़ते हुए
बेंगलुरु कोर्ट में सजा सुनते समय प्रज्वल रेवन्ना हाथ जोड़ते हुए

बेंगलुरु: पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा के पोते और पूर्व जेडीएस सांसद प्रज्वल रेवन्ना को शनिवार को बेंगलुरु की एमपी/एमएलए विशेष अदालत ने दुष्कर्म और अश्लील वीडियो मामले में दोषी मानते हुए मृत्यु तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही अदालत ने ₹10 लाख का जुर्माना भी लगाया, जिसमें से ₹7 लाख पीड़िता को दिए जाएंगे।

जज संतोष गजानन भट की अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा कि प्रज्वल को IPC की धारा 376(2)(N) और 376(2)(K) के तहत दोहरी उम्रकैद की सजा दी जाती है। अदालत ने स्पष्ट किया कि दोषी ने महिला पर प्रभुत्व जमाकर बार-बार दुष्कर्म किया और इसका वीडियो भी बनाया।

फैसले के वक्त कोर्ट में भावुक हो गए प्रज्वल

सजा सुनाए जाने से पहले अदालत में प्रज्वल रेवन्ना भावुक हो गए और हाथ जोड़कर खड़े हो गए। उन्होंने कहा कि चुनाव के समय यह मामला सामने आना राजनीति से प्रेरित है। उन्होंने दावा किया कि जब वे सांसद थे, तब किसी ने शिकायत नहीं की थी। कोर्ट में प्रज्वल ने अपनी शैक्षणिक योग्यता बताते हुए कहा कि वे मैकेनिकल इंजीनियरिंग के छात्र रहे हैं और उनकी गलती केवल इतनी थी कि वे राजनीति में बहुत जल्दी आगे बढ़ गए।

पीड़िता को मुआवजा, कोर्ट ने वीडियो सबूतों को माना निर्णायक

विशेष अदालत ने सजा के साथ यह भी निर्देश दिया कि जुर्माने की राशि में से ₹7 लाख पीड़िता को दिए जाएं। यह मामला K.R. नगर की एक घरेलू सहायिका द्वारा दर्ज शिकायत से जुड़ा है। वीडियो में पीड़िता, जो एक फार्महाउस में काम करती थी, रेवन्ना से विनती करती दिखी कि उसे छोड़ दिया जाए क्योंकि उसने उसके परिवार की वर्षों सेवा की है।

चुनाव के बाद देश छोड़कर भागे थे प्रज्वल

लोकसभा चुनाव के दौरान ऐसे वीडियो सामने आए थे, जिनमें प्रज्वल को महिलाओं के साथ आपत्तिजनक हालत में दिखाया गया था। वीडियो के वायरल होने के बाद प्रज्वल देश से बाहर चले गए थे। 31 मई 2024 को वे बेंगलुरु लौटे, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

जमानत याचिकाएं खारिज, 14 महीने से जेल में बंद

प्रज्वल रेवन्ना की कई जमानत याचिकाएं अदालतों ने खारिज कर दी हैं और वे पिछले 14 महीने से जेल में हैं। उनकी वापसी पूर्व पीएम देवेगौड़ा और केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी की सार्वजनिक अपील के बाद संभव हो पाई। अदालत ने इस मामले में 26 साक्ष्यों की समीक्षा की है, और तीन अन्य मामलों में भी रेवन्ना आरोपी हैं।

अभियोजन की दलील: समाज को कड़ा संदेश जरूरी

विशेष लोक अभियोजकों ने कोर्ट से आग्रह किया कि यह मामला केवल एक अपराध नहीं, बल्कि समाज में भय और असुरक्षा का प्रतीक बन गया है। उन्होंने कहा कि ऐसी सजा समाज में स्पष्ट संदेश देगी कि प्रभावशाली व्यक्ति भी कानून से ऊपर नहीं हैं।

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