चंडीगढ़: गुरुग्राम के शिकोहपुर लैंड डील से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कारोबारी Robert Vadra को राउज एवेन्यू कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने 50 हजार रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि के एक जमानतदार पर जमानत मंजूर कर ली।
राउज एवेन्यू कोर्ट में हुई सुनवाई
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत चार्जशीट दाखिल की थी। कोर्ट ने चार्जशीट पर संज्ञान लेते हुए उन्हें पेश होने के लिए समन जारी किया था। सुनवाई के दौरान वाड्रा कोर्ट में मौजूद रहे।
जमानत मिलने के बाद क्या बोले रॉबर्ट वाड्रा
जमानत मिलने के बाद Robert Vadra ने कहा कि उन्हें देश की न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा है। उन्होंने कहा कि वह जांच में सहयोग करते रहेंगे और उनके पास छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि वह सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करेंगे।
क्या है गुरुग्राम लैंड डील मामला
यह मामला गुरुग्राम के शिकोहपुर गांव की जमीन से जुड़ा है। जांच एजेंसियों के अनुसार, रॉबर्ट वाड्रा की कंपनी स्काई लाइट हॉस्पिटेलिटी ने वर्ष 2008 में करीब 3.5 एकड़ जमीन लगभग 7.5 करोड़ रुपये में खरीदी थी। आरोप है कि बाद में राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल कर इस जमीन का कमर्शियल लाइसेंस हासिल किया गया।
इसके बाद वर्ष 2012 में यही जमीन रियल एस्टेट कंपनी DLF को लगभग 58 करोड़ रुपये में बेच दी गई। जांच एजेंसियों का दावा है कि इस सौदे से करोड़ों रुपये का गैरकानूनी लाभ कमाया गया।
ED की जांच में क्या आरोप
ED का आरोप है कि जमीन की कीमत बढ़ाने और लाइसेंस दिलाने में प्रभाव का इस्तेमाल किया गया। एजेंसी ने इस मामले को मनी लॉन्ड्रिंग का केस बताया है और कई संपत्तियों को अटैच भी किया है।
IAS अधिकारी अशोक खेमका के फैसले से आया था मामला चर्चा में
यह मामला उस समय चर्चा में आया था जब IAS अधिकारी Ashok Khemka ने वर्ष 2012 में जमीन की म्यूटेशन प्रक्रिया को रद्द कर दिया था। उन्होंने प्रक्रिया में अनियमितताओं की बात कही थी। इसके बाद वर्ष 2018 में FIR दर्ज हुई और फिर ED ने जांच शुरू की।


