नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को तलब करने वाले विशेष सीबीआई अदालत के 2015 के आदेश को रद्द कर दिया है। शीर्ष अदालत ने माना कि निचली अदालत के पास सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को खारिज कर उनके खिलाफ संज्ञान लेने का पर्याप्त आधार नहीं था।
सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार की सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने मनमोहन सिंह की ओर से दायर अपील स्वीकार करते हुए सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को मंजूरी दे दी। इसके साथ ही उन्हें दी गई क्लीन चिट बरकरार रखते हुए उनके खिलाफ कार्यवाही समाप्त कर दी गई।
निधन के डेढ़ साल बाद आया फैसला
यह फैसला पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के निधन के डेढ़ वर्ष से अधिक समय बाद आया है। उनका निधन 26 दिसंबर 2024 को हुआ था।
सुनवाई के दौरान उनके पक्ष की पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत से कहा था कि याचिका का निस्तारण इस आधार पर किया जा सकता है कि उनके खिलाफ की गई टिप्पणियों को निरस्त कर दिया जाए।
पहले समन पर लगाई गई थी रोक
सुप्रीम कोर्ट ने 1 अप्रैल 2025 को विशेष अदालत द्वारा जारी समन पर अंतरिम रोक लगा दी थी।
सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल ने दलील दी थी कि स्क्रीनिंग कमेटी की सिफारिश से अलग जाकर हिंडाल्को को कोयला ब्लॉक आवंटित करने का निर्णय एक प्रशासनिक फैसला था और इसमें कोई अवैधता नहीं थी।
प्रशासनिक निर्णय होने का दिया था तर्क
कपिल सिब्बल ने अदालत में कहा था कि किसी कोयला खदान का आवंटन करना या किसी निजी पक्ष को ब्लॉक देना अपने आप में गैरकानूनी नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि उस समय ऐसा करने पर कोई वैधानिक प्रतिबंध नहीं था और स्क्रीनिंग कमेटी की सिफारिश से अलग निर्णय लेना भी प्रशासनिक अधिकारों के दायरे में आता है।


