नरेशपाल गंगवार बने देश के नए उच्च शिक्षा सचिव, खीरा सब्सिडी विवाद भी रहा चर्चा में

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नरेशपाल गंगवार की उच्च शिक्षा सचिव के रूप में नियुक्ति और खीरा सब्सिडी विवाद
नरेशपाल गंगवार की उच्च शिक्षा सचिव के रूप में नियुक्ति और खीरा सब्सिडी विवाद

नई दिल्ली: राजस्थान कैडर के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी नरेशपाल गंगवार को केंद्र सरकार ने देश का नया उच्च शिक्षा सचिव नियुक्त किया है। उन्होंने इस पद पर विनीत जोशी का स्थान लिया है, जबकि विनीत जोशी को पंचायती राज मंत्रालय में भेजा गया है। 1994 बैच के आईएएस अधिकारी नरेशपाल गंगवार वर्तमान में केंद्र सरकार में प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत थे और मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय में सचिव के पद पर सेवाएं दे रहे थे।

नियुक्ति के साथ फिर चर्चा में आया सब्सिडी मामला

गंगवार की नियुक्ति ऐसे समय हुई है, जब उनके परिवार को खीरे की खेती के लिए मिली सरकारी सब्सिडी का मामला चर्चा में है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उनकी पत्नी, बेटे और मां को पिछले पांच वर्षों में कुल 1.16 करोड़ रुपये की सब्सिडी मिली थी।

क्या है खीरा सब्सिडी का मामला?

यह सब्सिडी उत्पादन एवं कटाई के बाद प्रबंधन के माध्यम से वाणिज्यिक बागवानी विकास योजना के तहत दी गई थी। इस योजना का संचालन राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) द्वारा किया जाता है। रिपोर्टों के अनुसार, गंगवार के वार्षिक संपत्ति विवरण (2021-22) में इस योजना से जुड़े केवल एक प्रोजेक्ट का उल्लेख किया गया था।

मां, बेटे और पत्नी को मिली सब्सिडी

जानकारी के अनुसार, गंगवार की मां बिंदुमती को जोबनेर तहसील के भैंसपुरा गांव में खीरे की खेती के लिए जनवरी 2025 में 46.03 लाख रुपये की सब्सिडी मिली। उन्होंने 8,880 वर्गमीटर क्षेत्र में खेती की थी। उनके बेटे कुमार ऋत्विक को भी जोबनेर के ढाणी बोराज गांव में खीरे की खेती के लिए मार्च 2023 में 46.49 लाख रुपये की सब्सिडी मिली। वहीं, उनकी पत्नी डॉ. रंजीता सिंह को वर्ष 2021-22 में 24.36 लाख रुपये की सब्सिडी प्रदान की गई।

संपत्ति विवरण में क्या बताया?

एक जनवरी 2026 को वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए प्रस्तुत संपत्ति विवरण में गंगवार ने पत्नी, मां, बेटे और बेटी के नाम पर कृषि भूमि का उल्लेख किया। उन्होंने यह भी बताया कि संबंधित भूमि पर राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड की कमर्शियल बागवानी परियोजना स्वीकृत है, जिसकी फंडिंग बैंक ऋण, एनएचबी सब्सिडी और स्वयं के अंशदान से की जा रही है।

गंगवार ने दी थी सफाई

मामला चर्चा में आने के बाद नरेशपाल गंगवार ने कहा था कि अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम, 1968 के अनुसार केवल वही परिवार के सदस्य इस दायरे में आते हैं, जो सरकारी अधिकारी पर पूरी तरह आश्रित हों। उनका कहना था कि उनकी मां और बेटा उन पर आश्रित नहीं हैं, इसलिए वार्षिक संपत्ति विवरण में उनसे संबंधित जानकारी देना अनिवार्य नहीं था।

कैसे मिलती है यह सब्सिडी?

यह योजना राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड के एकीकृत बागवानी विकास मिशन (MIDH) के अंतर्गत संचालित की जाती है। इसका उद्देश्य वाणिज्यिक स्तर पर बागवानी फसलों की खेती को बढ़ावा देना है। योजना के तहत खीरा, शिमला मिर्च और टमाटर सहित कई फसलों तथा विभिन्न प्रकार के फूलों की खेती पर परियोजना लागत का अधिकतम 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाता है। प्रति परिवार सब्सिडी की अधिकतम सीमा 1 करोड़ रुपये निर्धारित है।

योजना का लाभ किसान, स्वयं सहायता समूह, किसान उत्पादक संगठन, सहकारी समितियां, ट्रस्ट, कंपनियां और अन्य पात्र संस्थाएं प्राप्त कर सकती हैं। राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) के दिशा-निर्देशों के अनुसार पात्रता और स्वीकृति की प्रक्रिया तय की जाती है।

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