तमिलनाडु में विजय सरकार बनाएंगे, राज्यपाल ने दिया न्योता

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तमिलनाडु में सरकार गठन के बाद विजय की तस्वीर
तमिलनाडु में सरकार गठन के बाद विजय की तस्वीर

चेन्नई : अभिनेता से राजनेता बने थलापति विजय को तमिलनाडु में सरकार बनाने का न्योता मिल गया है। राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने शनिवार को तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) प्रमुख विजय को सरकार गठन के लिए आमंत्रित किया। सूत्रों के अनुसार विजय रविवार सुबह 10 बजे मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे।

सहयोगी दलों के समर्थन से बहुमत

वीसीके और आईयूएमएल द्वारा बिना शर्त समर्थन देने के बाद टीवीके ने विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा हासिल कर लिया। कांग्रेस, CPI, CPI(M), VCK और IUML के समर्थन से टीवीके गठबंधन के पास 121 विधायकों का समर्थन हो गया है।

राज्यपाल से मुलाकात के बाद साफ हुआ रास्ता

सहयोगी दलों का समर्थन मिलने के बाद विजय ने राज्यपाल से मुलाकात की। इसके बाद सरकार गठन का रास्ता साफ हो गया। इससे पहले विजय राज्यपाल से तीन बार मिल चुके थे, लेकिन पर्याप्त समर्थन पत्र नहीं होने के कारण उन्हें सरकार बनाने का निमंत्रण नहीं मिला था।

किस दल ने कितना समर्थन दिया

टीवीके को समर्थन देने वाले दलों में कांग्रेस के 5 विधायक, CPI के 2 विधायक, CPI(M) के 2 विधायक, VCK के 2 विधायक और IUML के 2 विधायक शामिल हैं। इन 13 विधायकों के समर्थन से गठबंधन की कुल संख्या 121 पहुंच गई।

TVK का चुनावी प्रदर्शन

तमिलनाडु विधानसभा की 234 सीटों में सरकार बनाने के लिए 118 सीटों की आवश्यकता होती है। अपने पहले चुनाव में टीवीके ने 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरकर सामने आई। हालांकि बहुमत से पार्टी कुछ सीटें दूर रह गई थी।

तकनीकी स्थिति भी हुई स्पष्ट

विजय ने दो सीटों से चुनाव जीता है और नियमानुसार उन्हें एक सीट छोड़नी होगी। इसके बाद टीवीके के विधायकों की संख्या 107 रह जाएगी और विधानसभा की प्रभावी सदस्य संख्या 233 हो जाएगी।

IUML और VCK ने सौंपे समर्थन पत्र

IUML नेताओं एसएसबी सैयद फारूक बाशा और एएम शाहजहां ने राज्यपाल को पत्र लिखकर टीवीके को समर्थन दिया। वहीं VCK अध्यक्ष थोल तिरुमावलवन ने भी आधिकारिक समर्थन पत्र सौंपा।

कांग्रेस ने बहुमत का दावा किया

कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने कहा कि सरकार गठन के लिए जरूरी 118 का आंकड़ा हासिल कर लिया गया है।

राजनीतिक रूप से ऐतिहासिक घटनाक्रम

विजय के मुख्यमंत्री बनने के साथ ही तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। वह 1967 के बाद पहले ऐसे नेता होंगे जो राज्य की दो प्रमुख द्रविड़ पार्टियों DMK और AIADMK के गठबंधन से बाहर रहकर मुख्यमंत्री पद तक पहुंचेंगे।

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