CAG रिपोर्ट में लाडकी बहिन योजना पर सवाल, 3,541 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च का दावा

0
4
CAG रिपोर्ट में महाराष्ट्र की लाडकी बहिन योजना पर वित्तीय अनियमितताओं का उल्लेख
CAG रिपोर्ट में महाराष्ट्र की लाडकी बहिन योजना पर वित्तीय अनियमितताओं का उल्लेख

मुंबई: नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में महाराष्ट्र सरकार की लाडकी बहिन योजना के वित्तीय प्रबंधन को लेकर कई टिप्पणियां की गई हैं। राज्य विधानसभा में पेश रिपोर्ट के अनुसार, योजना के लिए स्वीकृत बजट की तुलना में 3,541.16 करोड़ रुपये अधिक खर्च किए गए। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि महिला एवं बाल विकास विभाग ने अतिरिक्त खर्च को लेकर कोई स्पष्ट जवाब उपलब्ध नहीं कराया।

बजट से अधिक खर्च का उल्लेख

रिपोर्ट के अनुसार, योजना के लिए 29,693.09 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया गया था, जबकि कुल 33,237.24 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इस प्रकार योजना पर 3,541.16 करोड़ रुपये का अतिरिक्त व्यय दर्ज किया गया।

CAG के अनुसार, योजना के लिए उपलब्ध कराए गए कुल अनुदान में 26,200 करोड़ रुपये अनुपूरक प्रावधानों के माध्यम से तथा 3,490.75 करोड़ रुपये पुनर्विनियोजन के जरिए शामिल किए गए थे।

ऑफ-बजट उधारी पर भी जताई चिंता

वर्ष 2024-25 की राज्य वित्त ऑडिट रिपोर्ट के तीसरे अध्याय में CAG ने महाराष्ट्र सरकार की वित्तीय व्यवस्था पर भी टिप्पणी की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार द्वारा ऑफ-बजट उधारी का उपयोग बढ़ा है और वित्तीय लेनदेन के दस्तावेज समय पर प्रस्तुत नहीं किए जा रहे हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, 31 मार्च 2025 तक ऑफ-बजट उधारी 28,640 करोड़ रुपये तक पहुंच गई थी।

उपयोग प्रमाण पत्र और AC बिल लंबित

CAG ने बताया कि 40,097 करोड़ रुपये से जुड़े 12,829 उपयोग प्रमाण पत्र (UC) 31 मार्च 2025 तक लंबित थे। रिपोर्ट में कहा गया है कि उपयोग प्रमाण पत्र समय पर जमा नहीं करना राज्य सरकार के वित्तीय नियमों का उल्लंघन है और इससे वित्तीय निगरानी तथा आंतरिक नियंत्रण प्रणाली पर सवाल उठते हैं।

इसके अलावा, 3,532 करोड़ रुपये के 1,698 एब्स्ट्रैक्ट कंटिजेंसी (AC) बिल भी 31 मार्च 2025 तक लंबित बताए गए हैं। इनमें से केवल मार्च 2025 के दौरान ही 35.18 करोड़ रुपये के 268 AC बिल जारी किए गए थे, जिनका समायोजन लंबित है।

रिपोर्ट में वित्तीय प्रबंधन पर टिप्पणी

CAG रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्तीय प्रबंधन से जुड़े विभिन्न मामलों में सुधार की आवश्यकता है। रिपोर्ट के अनुसार, लंबित उपयोग प्रमाण पत्र, ऑफ-बजट उधारी और AC बिलों के समय पर समायोजन जैसे मुद्दों पर प्रभावी निगरानी की जरूरत है। CAG की रिपोर्ट अब राज्य विधानसभा के समक्ष प्रस्तुत की जा चुकी है।

admin
Author: admin

News

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here