नई दिल्ली: परिसीमन (Delimitation) को लेकर चल रही राजनीतिक चर्चाओं के बीच राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने स्पष्ट किया है कि उनकी पार्टी ने अभी इस मुद्दे पर कोई अंतिम रुख तय नहीं किया है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित विधेयक सामने आने के बाद INDIA गठबंधन के सभी सहयोगी दल मिलकर इस पर विस्तार से चर्चा करेंगे और उसके बाद निर्णय लिया जाएगा।
50 प्रतिशत कोटा के मुद्दे पर भी दिया संकेत
सुप्रिया सुले ने कहा कि उनकी पार्टी ने अभी तक परिसीमन को लेकर किसी से औपचारिक बातचीत नहीं की है और न ही इस विषय पर उनसे संपर्क किया गया है। उन्होंने कहा कि यदि प्रस्तावित विधेयक में 50 प्रतिशत कोटा से जुड़ा प्रावधान शामिल होता है, तो उस पर विचार किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि DMK, समाजवादी पार्टी और उनकी पार्टी पहले भी इस विषय पर 50 प्रतिशत कोटा के मुद्दे पर विचार करने की बात कह चुकी हैं।
महिला आरक्षण लागू करने की दोहराई मांग
सुप्रिया सुले ने कहा कि INDIA गठबंधन ने परिसीमन की मांग नहीं की थी। गठबंधन की प्राथमिक मांग महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की रही है।
उन्होंने बताया कि पिछले बजट सत्र के दौरान केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने उन्हें, असदुद्दीन ओवैसी और अरविंद सावंत को चर्चा के लिए बुलाया था। बाद में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के नेतृत्व में गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर सभी विपक्षी दलों के साथ संयुक्त बैठक की मांग भी की गई थी।
NDA में शामिल होने की अटकलों पर विराम
हाल के दिनों में NCP-SP के NDA में शामिल होने की चर्चाएं तेज हुई थीं। हालांकि, सुप्रिया सुले के ताजा बयान के बाद इन अटकलों को फिलहाल विराम मिलता दिखाई दे रहा है।
इससे पहले पार्टी के आधिकारिक प्रवक्ता महेश तापसे भी ऐसी सभी अटकलों को निराधार बता चुके हैं और कहा था कि पार्टी नेतृत्व ने NDA में शामिल होने की संभावना से इनकार किया है।
शिवसेना (UBT) ने भी रखी अपनी राय
उधर, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने कहा कि यदि सरकार संबंधित विधेयक दोबारा लाती है तो विपक्ष उसमें संशोधन की मांग करेगा। उन्होंने कहा कि विपक्ष द्वारा सुझाए गए संशोधन स्वीकार किए जाने पर ही आगे विधेयक पर चर्चा की जाएगी।
विधेयक पर आगे रहेगी राजनीतिक नजर
फिलहाल परिसीमन से जुड़े किसी भी प्रस्तावित विधेयक पर अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। ऐसे में राजनीतिक दलों की नजर सरकार द्वारा लाए जाने वाले अंतिम मसौदे और उस पर होने वाली संसदीय चर्चा पर टिकी हुई है। INDIA गठबंधन और अन्य विपक्षी दलों का अंतिम रुख भी विधेयक के आधिकारिक रूप से पेश होने के बाद ही स्पष्ट होगा।


