NEET विवाद के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा, हनुमान बेनीवाल ने बताया युवाओं की जीत

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NEET विवाद के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर हनुमान बेनीवाल की प्रतिक्रिया
NEET विवाद के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर हनुमान बेनीवाल की प्रतिक्रिया

दिल्ली: देश में NEET-UG परीक्षा की गड़बड़ियों और उसके बाद हुए देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना त्यागपत्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजा है। पत्र में उन्होंने कहा कि वे देश की युवाशक्ति को किसी भी भ्रम और राष्ट्रविरोधी ताकतों के कुचक्र में फंसने से बचाने के लिए पद छोड़ रहे हैं।

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर सामने आते ही राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के सांसद हनुमान बेनीवाल ने इसे मेहनतकश युवाओं की बड़ी जीत बताया।

धर्मेंद्र प्रधान ने पत्र में क्या लिखा

धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पत्र में लिखा कि पिछले कुछ दिनों की घटनाओं से उनका मन अत्यंत दुखी है। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर और देशभर में बनी स्थिति का राष्ट्रविरोधी ताकतें लाभ न उठा सकें और विद्यार्थियों का भविष्य कानूनी उलझनों में न फंसे, इसलिए उन्होंने प्रधानमंत्री को इस्तीफा भेजा है।

उन्होंने यह भी लिखा कि 3 मई 2026 को आयोजित NEET-UG परीक्षा में धांधली के आरोप सामने आने के बाद सरकार ने तुरंत कार्रवाई करते हुए CBI जांच के आदेश दिए थे। परीक्षा रद्द कर दोबारा आयोजित की गई, 21 जून को पुनः परीक्षा कराई गई और 16 जुलाई को परिणाम घोषित किए गए।

बेनीवाल बोले- पहले ही दे देना चाहिए था इस्तीफा

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया देते हुए हनुमान बेनीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि यदि शिक्षा मंत्री में नैतिकता होती तो वे आंदोलन की शुरुआत में ही इस्तीफा दे देते।

उन्होंने कहा कि इससे जंतर-मंतर से लेकर संसद भवन तक प्रदर्शन के दौरान घायल हुए कई युवाओं को बचाया जा सकता था। बेनीवाल ने यह भी कहा कि NEET मामले की जांच CBI को सौंपते ही मंत्री को पद छोड़ देना चाहिए था, ताकि जांच पूरी तरह निष्पक्ष रह सके।

प्रधानमंत्री मोदी पर भी साधा निशाना

हनुमान बेनीवाल ने कहा कि उनकी पार्टी शुरू से ही शिक्षा मंत्री को बर्खास्त करने की मांग कर रही थी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट करने की मांग की कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार करने की अनुशंसा की गई है या नहीं।

उन्होंने कहा कि देश की युवा एकता ने सरकार को झुकने पर मजबूर कर दिया है।

सियासी गलियारों में बढ़ी हलचल

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद केंद्र सरकार पर दबाव बढ़ गया है। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्र संगठनों का कहना है कि इस्तीफा केवल पहला कदम है और जब तक दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती, उनका आंदोलन जारी रहेगा।

वहीं विपक्षी दल अब इस मुद्दे को संसद और सड़कों पर उठाने की तैयारी कर रहे हैं। शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा सुरक्षा और जवाबदेही को लेकर आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

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