सज्जन कुमार का निधन: 1984 दंगों से तिहाड़ जेल तक, जानिए पूरी कहानी

0
13
पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार का राजनीतिक सफर और 1984 सिख विरोधी दंगों का मामला
पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार का राजनीतिक सफर और 1984 सिख विरोधी दंगों का मामला

नई दिल्ली: पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार का गुरुवार को निधन हो गया। 80 वर्ष की आयु में उन्होंने तिहाड़ जेल में दम तोड़ा। इसके बाद उन्हें सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।

एक पार्षद के तौर पर राजनीतिक करियर शुरू करने वाले सज्जन कुमार दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश में सांसद बने, लेकिन 1984 में हुए सिख विरोधी दंगों ने उनके राजनीतिक जीवन की दिशा बदल दी।

अब उनके निधन के बाद एक बार फिर सवाल उठ रहा है कि सज्जन कुमार तिहाड़ जेल में क्यों बंद थे और 1984 के सिख विरोधी दंगों में उनकी भूमिका को लेकर क्या आरोप लगे थे?

पार्षद से सांसद तक का राजनीतिक सफर

23 सितंबर 1945 को जन्मे सज्जन कुमार के पिता का नाम रघुनाथ सिंह था। उन्होंने मैट्रिक तक पढ़ाई की थी। राजनीति में आने से पहले वह बेकरी का काम करते थे।

किसी माध्यम से वह संजय गांधी के संपर्क में आए। इसके बाद 1977 में दिल्ली नगर निगम के पार्षद चुने गए। जल्द ही उन्हें दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी का महासचिव बनाया गया।

1980 में वह बाहरी दिल्ली लोकसभा सीट से सांसद चुने गए। यह उनकी पहली बड़ी चुनावी जीत थी। इसके बाद 1991 और 2004 में भी उन्होंने इसी सीट से चुनाव जीतकर संसद में जगह बनाई।

बाहरी दिल्ली में उनकी मजबूत राजनीतिक पकड़ मानी जाती थी।

1984 के दंगों ने बदली राजनीतिक जिंदगी

वर्ष 1984 के सिख विरोधी दंगों ने सज्जन कुमार के जीवन और राजनीतिक करियर को पूरी तरह बदल दिया। इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में सिख विरोधी हिंसा भड़की थी।

इन दंगों के दौरान सज्जन कुमार की भूमिका को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए। लंबे समय तक चली कानूनी लड़ाई के बाद अदालत ने उन्हें दोषी ठहराया और उम्रकैद की सजा सुनाई।

कांग्रेस से इस्तीफा देकर तिहाड़ पहुंचे

2018 में दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा सजा सुनाए जाने के बाद सज्जन कुमार ने कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था।

31 दिसंबर 2018 से वह तिहाड़ जेल में बंद थे। अप्रैल 2026 में उन्होंने बीमार पत्नी से मिलने के लिए जमानत की मांग की थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी।

1984 दंगों में क्या थे आरोप?

1984 में दिल्ली में हुए सिख विरोधी दंगों के दौरान सज्जन कुमार पर सुल्तानपुरी, दिल्ली कैंट और पालम कॉलोनी जैसे इलाकों में हिंसा भड़काने के आरोप लगे थे।

दंगों के पीड़ितों की ओर से दिए गए बयानों में आरोप लगाया गया था कि 1 नवंबर 1984 को दिल्ली में एकत्र भीड़ को संबोधित करते हुए सज्जन कुमार ने सिखों के खिलाफ हिंसा भड़काने वाली बात कही थी। कई गवाहों ने अपने बयानों में दावा किया कि सज्जन कुमार ने सिख परिवारों के घरों की पहचान करवाने और भीड़ को हमले के लिए उकसाने में भूमिका निभाई।

आरोप यह भी थे कि उनके समर्थकों ने वोटर लिस्ट की मदद से सिखों के घरों और कारोबारों की पहचान की। इसके बाद कई घरों और दुकानों में तोड़फोड़ और आगजनी की गई तथा कई लोगों की हत्या की गई। सज्जन कुमार को इन्हीं मामलों में चली लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद दोषी ठहराया गया था और उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।

admin
Author: admin

News

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here